तोल्सतोय या रवींद्रनाथ ठाकुर की तरह रुपए-पैसे से बेफिक्र होकर लिखने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। ऐसे में लेखकों को इस बात का ध्यान रखना ही पड़ता है कि उन्हें अपनी लेखन कर्म से कुछ कमाई होती रहे।
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इलाहाबाद के करीब एक छोटे से गांव के जमींदार परिवार में जन्मीं सुभद्रा कुमारी चौहान ने बचपन में ही कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। राष्ट्रीयता की भावना को उन्होंने अपनी कविताओं के जरिए धार दिया था। उनके शब्द लोगों के भीतर राष्ट्रवाद की चेतना को जागृत करते थे।
हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय! मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार-क्षार।
डमरू की वह प्रलय-ध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार।